महाभारत 7.29.2
ततो गान्धारराजस्य सुतौ परपुरंजयौआर्छेतामर्जुनं संख्ये भ्रातरौ वृषकाचलौ
tato gāndhārarājasya sutau parapuraṃjayauārchetāmarjunaṃ saṃkhye bhrātarau vṛṣakācalau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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