महाभारत 7.29.8तावेकरथमारूढौ भ्रातरौ वृषकाचलौशरवर्षेण बीभत्सुमविध्येतां पुनः पुनःtāvekarathamārūḍhau bhrātarau vṛṣakācalauśaravarṣeṇa bībhatsumavidhyetāṃ punaḥ punaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें