महाभारत 7.30.12अयसामिव संपातः शिलानामिव चाभवत्दीव्यतां तुमुले युद्धे प्राणैरमिततेजसाम्ayasāmiva saṃpātaḥ śilānāmiva cābhavatdīvyatāṃ tumule yuddhe prāṇairamitatejasāmइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें