महाभारत 7.30.17
तेषु प्रमथ्यमानेषु द्रोणेनाद्भुतकर्मणापर्यवारयदासाद्य द्रोणं सेनापतिः स्वयम्
teṣu pramathyamāneṣu droṇenādbhutakarmaṇāparyavārayadāsādya droṇaṃ senāpatiḥ svayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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