महाभारत 7.30.25
तस्योद्यतासेः सुनसं शिरः कायात्सकुण्डलम्भल्लेनापाहरद्द्रौणिः स्मयमान इवानघ
tasyodyatāseḥ sunasaṃ śiraḥ kāyātsakuṇḍalambhallenāpāharaddrauṇiḥ smayamāna ivānagha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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