महाभारत 7.31.34
ततः सेनापतिः शीघ्रमयं काल इति ब्रुवन्नित्याभित्वरितानेव त्वरयामास पाण्डवान्
tataḥ senāpatiḥ śīghramayaṃ kāla iti bruvannityābhitvaritāneva tvarayāmāsa pāṇḍavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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