महाभारत 7.31.56
ता भुजाग्रैर्महावेगा विसृष्टा भुजगोपमाःदीप्यमाना महाशक्त्यो जग्मुराधिरथिं प्रति
tā bhujāgrairmahāvegā visṛṣṭā bhujagopamāḥdīpyamānā mahāśaktyo jagmurādhirathiṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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