महाभारत 7.32.24
बिभित्सता रथानीकं सौभद्रेणामितौजसाविक्रीडितं यथा संख्ये तन्ममाचक्ष्व संजय
bibhitsatā rathānīkaṃ saubhadreṇāmitaujasāvikrīḍitaṃ yathā saṃkhye tanmamācakṣva saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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