महाभारत 7.34.25
तत्कर्माद्य करिष्यामि हितं यद्वंशयोर्द्वयोःमातुलस्य च या प्रीतिर्भविष्यति पितुश्च मे
tatkarmādya kariṣyāmi hitaṃ yadvaṃśayordvayoḥmātulasya ca yā prītirbhaviṣyati pituśca me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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