महाभारत 7.34.27
युधिष्ठिर उवाच · yudhiṣṭhira uvāca
एवं ते भाषमाणस्य बलं सौभद्र वर्धताम्यस्त्वमुत्सहसे भेत्तुं द्रोणानीकं सुदुर्भिदम्
evaṃ te bhāṣamāṇasya balaṃ saubhadra vardhatāmyastvamutsahase bhettuṃ droṇānīkaṃ sudurbhidam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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