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महाभारत 7.35.32
विजङ्घकूबराक्षांश्च विनेमीननरानपिविचक्रोपस्करोपस्थान्भग्नोपकरणानपि
vijaṅghakūbarākṣāṃśca vinemīnanarānapivicakropaskaropasthānbhagnopakaraṇānapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविजङ्घकूबराक्षांश्च विनेमीननरानपिविचक्रोपस्करोपस्थान्भग्नोपकरणानपि
vijaṅghakūbarākṣāṃśca vinemīnanarānapivicakropaskaropasthānbhagnopakaraṇānapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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