महाभारत 7.35.39
निकृत्तवर्मकवचाञ्शकृन्मूत्रासृगाप्लुतान्निपातयन्नश्ववरांस्तावकान्सोऽभ्यरोचत
nikṛttavarmakavacāñśakṛnmūtrāsṛgāplutānnipātayannaśvavarāṃstāvakānso'bhyarocata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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