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महाभारत 7.36.2
ततो राजानमावृत्तं सौभद्रं प्रति संयुगेदृष्ट्वा द्रोणोऽब्रवीद्योधान्पर्याप्नुत नराधिपम्
tato rājānamāvṛttaṃ saubhadraṃ prati saṃyugedṛṣṭvā droṇo'bravīdyodhānparyāpnuta narādhipam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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