महाभारत 7.38.19
संरक्ष्यमाणो द्रोणेन मन्यते वीर्यमात्मनःआत्मसंभावितो मूढस्तं प्रमथ्नीत माचिरम्
saṃrakṣyamāṇo droṇena manyate vīryamātmanaḥātmasaṃbhāvito mūḍhastaṃ pramathnīta māciram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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