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महाभारत 7.38.30
अथ पणवमृदङ्गदुन्दुभीनां; कृकरमहानकभेरिझर्झराणाम्निनदमतिभृशं नराः प्रचक्रु;र्लवणजलोद्भवसिंहनादमिश्रम्
atha paṇavamṛdaṅgadundubhīnāṃ; kṛkaramahānakabherijharjharāṇāmninadamatibhṛśaṃ narāḥ pracakru;rlavaṇajalodbhavasiṃhanādamiśram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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