महाभारत 7.40.3
पितृपैतामहं कर्म कुर्वाणमतिमानुषम्दृष्ट्वार्दितं शरैः कार्ष्णिं त्वदीया हृषिताभवन्
pitṛpaitāmahaṃ karma kurvāṇamatimānuṣamdṛṣṭvārditaṃ śaraiḥ kārṣṇiṃ tvadīyā hṛṣitābhavan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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