महाभारत 7.40.4
तस्याभिमन्युरायम्य स्मयन्नेकेन पत्रिणाशिरः प्रच्यावयामास स रथात्प्रापतद्भुवि
tasyābhimanyurāyamya smayannekena patriṇāśiraḥ pracyāvayāmāsa sa rathātprāpatadbhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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