महाभारत 7.42.14
स हताश्वादवप्लुत्य छिन्नधन्वा रथोत्तमात्सात्यकेराप्लुतो यानं गिर्यग्रमिव केसरी
sa hatāśvādavaplutya chinnadhanvā rathottamātsātyakerāpluto yānaṃ giryagramiva kesarī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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