महाभारत 7.42.2
तमूहुः सारथेर्वश्याः सैन्धवाः साधुवाहिनःविकुर्वाणा बृहन्तोऽश्वाः श्वसनोपमरंहसः
tamūhuḥ sārathervaśyāḥ saindhavāḥ sādhuvāhinaḥvikurvāṇā bṛhanto'śvāḥ śvasanopamaraṃhasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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