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महाभारत 7.43.13
तेषां शरान्सेष्वसनाञ्शरीराणि शिरांसि चसकुण्डलानि स्रग्वीणि क्रुद्धश्चिच्छेद फाल्गुनिः
teṣāṃ śarānseṣvasanāñśarīrāṇi śirāṃsi casakuṇḍalāni sragvīṇi kruddhaściccheda phālguniḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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