महाभारत 7.43.4तेषां तस्य च संमर्दो दारुणः समपद्यतसृजतां शरवर्षाणि प्रसक्तममितौजसाम्teṣāṃ tasya ca saṃmardo dāruṇaḥ samapadyatasṛjatāṃ śaravarṣāṇi prasaktamamitaujasāmइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें