महाभारत 7.43.7
तेनान्तरेणाभिमन्योर्यन्तापासारयद्रथम्रथव्रजास्ततो हृष्टाः साधु साध्विति चुक्रुशुः
tenāntareṇābhimanyoryantāpāsārayadrathamrathavrajāstato hṛṣṭāḥ sādhu sādhviti cukruśuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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