महाभारत 7.44.7ये केचन गतास्तस्य समीपमपलायिनःन ते प्रतिन्यवर्तन्त समुद्रादिव सिन्धवःye kecana gatāstasya samīpamapalāyinaḥna te pratinyavartanta samudrādiva sindhavaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें