महाभारत 7.44.8महाग्राहगृहीतेव वातवेगभयार्दितासमकम्पत सा सेना विभ्रष्टा नौरिवार्णवेmahāgrāhagṛhīteva vātavegabhayārditāsamakampata sā senā vibhraṣṭā naurivārṇaveइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें