महाभारत 7.45.15
सुदृष्टः क्रियतां लोको अमुं लोकं गमिष्यसिपश्यतां बान्धवानां त्वां नयामि यमसादनम्
sudṛṣṭaḥ kriyatāṃ loko amuṃ lokaṃ gamiṣyasipaśyatāṃ bāndhavānāṃ tvāṃ nayāmi yamasādanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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