महाभारत 7.45.19
ततो द्रोणः कृपः कर्णो द्रोणपुत्रो बृहद्बलःकृतवर्मा च हार्दिक्यः षड्रथाः पर्यवारयन्
tato droṇaḥ kṛpaḥ karṇo droṇaputro bṛhadbalaḥkṛtavarmā ca hārdikyaḥ ṣaḍrathāḥ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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