महाभारत 7.45.3
दुर्योधनेऽथ विमुखे राजपुत्रशते हतेसौभद्रे प्रतिपत्तिं कां प्रत्यपद्यन्त मामकाः
duryodhane'tha vimukhe rājaputraśate hatesaubhadre pratipattiṃ kāṃ pratyapadyanta māmakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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