महाभारत 7.47.18
ततो द्रोणो महेष्वासः सर्वांस्तान्प्रत्यभाषतअस्ति वोऽस्यान्तरं कश्चित्कुमारस्य प्रपश्यति
tato droṇo maheṣvāsaḥ sarvāṃstānpratyabhāṣataasti vo'syāntaraṃ kaścitkumārasya prapaśyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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