महाभारत 7.49.17
महेन्द्रशत्रवो येन हिरण्यपुरवासिनःअक्ष्णोर्निमेषमात्रेण पौलोमाः सगणा हताः
mahendraśatravo yena hiraṇyapuravāsinaḥakṣṇornimeṣamātreṇa paulomāḥ sagaṇā hatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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