महाभारत 7.50.14
अपि स्वस्ति भवेदद्य भ्रातृभ्यो मम माधवन हि शुध्यति मे भावो दृष्ट्वा स्वजनमाकुलम्
api svasti bhavedadya bhrātṛbhyo mama mādhavana hi śudhyati me bhāvo dṛṣṭvā svajanamākulam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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