महाभारत 7.50.43
नूनं वैवस्वतश्च त्वा वरुणश्च प्रियातिथिःशतक्रतुर्धनेशश्च प्राप्तमर्चन्त्यभीरुकम्
nūnaṃ vaivasvataśca tvā varuṇaśca priyātithiḥśatakraturdhaneśaśca prāptamarcantyabhīrukam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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