महाभारत 7.50.79
एवमुक्त्वा ततो वाक्यं तिष्ठंश्चापवरासिमान्न स्माशक्यत बीभत्सुः केनचित्प्रसमीक्षितुम्
evamuktvā tato vākyaṃ tiṣṭhaṃścāpavarāsimānna smāśakyata bībhatsuḥ kenacitprasamīkṣitum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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