महाभारत 7.51.3स वार्यमाणो रथिभी रक्षितेन मया तथाअस्मानपि जघानाशु पीडयन्निशितैः शरैःsa vāryamāṇo rathibhī rakṣitena mayā tathāasmānapi jaghānāśu pīḍayanniśitaiḥ śaraiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें