महाभारत 7.53.14
तां न देवा न गन्धर्वा नासुरोरगराक्षसाःउत्सहन्तेऽन्यथा कर्तुं प्रतिज्ञां सव्यसाचिनः
tāṃ na devā na gandharvā nāsuroragarākṣasāḥutsahante'nyathā kartuṃ pratijñāṃ savyasācinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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