महाभारत 7.53.36
ग्राम्यारण्यानि भूतानि स्थावराणि चराणि चत्रातारः सिन्धुराजस्य भवन्ति मधुसूदन
grāmyāraṇyāni bhūtāni sthāvarāṇi carāṇi catrātāraḥ sindhurājasya bhavanti madhusūdana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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