महाभारत 7.54.22
व्यूढोरस्को महाबाहुरनिवर्ती वरप्रणुत्गतस्तव वरारोहे पुत्रः स्वर्गं ज्वरं जहि
vyūḍhorasko mahābāhuranivartī varapraṇutgatastava varārohe putraḥ svargaṃ jvaraṃ jahi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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