महाभारत 7.56.26
श्वो निरीक्षन्तु मे वीर्यं त्रयो लोका महाहवेधनंजयार्थं समरे पराक्रान्तस्य दारुक
śvo nirīkṣantu me vīryaṃ trayo lokā mahāhavedhanaṃjayārthaṃ samare parākrāntasya dāruka
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें