महाभारत 7.56.32
गदां कौमोदकीं दिव्यां शक्तिं चक्रं धनुः शरान्आरोप्य वै रथे सूत सर्वोपकरणानि च
gadāṃ kaumodakīṃ divyāṃ śaktiṃ cakraṃ dhanuḥ śarānāropya vai rathe sūta sarvopakaraṇāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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