महाभारत 7.56.7
न पाण्डवानां शिबिरे कश्चित्सुष्वाप तां निशाम्प्रजागरः सर्वजनमाविवेश विशां पते
na pāṇḍavānāṃ śibire kaścitsuṣvāpa tāṃ niśāmprajāgaraḥ sarvajanamāviveśa viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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