महाभारत 7.57.29
वृषदंशं च शैलेन्द्रं महामन्दरमेव चअप्सरोभिः समाकीर्णं किंनरैश्चोपशोभितम्
vṛṣadaṃśaṃ ca śailendraṃ mahāmandarameva caapsarobhiḥ samākīrṇaṃ kiṃnaraiścopaśobhitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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