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महाभारत 7.57.47
येन कार्येण संप्राप्तौ युवां तत्साधयामि वाम्व्रियतामात्मनः श्रेयस्तत्सर्वं प्रददानि वाम्
yena kāryeṇa saṃprāptau yuvāṃ tatsādhayāmi vāmvriyatāmātmanaḥ śreyastatsarvaṃ pradadāni vām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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