महाभारत 7.57.55
नमो नमस्ते सेव्याय भूतानां प्रभवे सदाब्रह्मवक्त्राय शर्वाय शंकराय शिवाय च
namo namaste sevyāya bhūtānāṃ prabhave sadābrahmavaktrāya śarvāya śaṃkarāya śivāya ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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