महाभारत 7.57.68
ततस्तु तत्सरो गत्वा सूर्यमण्डलसंनिभम्नागमन्तर्जले घोरं ददृशातेऽर्जुनाच्युतौ
tatastu tatsaro gatvā sūryamaṇḍalasaṃnibhamnāgamantarjale ghoraṃ dadṛśāte'rjunācyutau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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