महाभारत 7.59.16
स युवा वृषभस्कन्धो दीर्घबाहुर्महाबलःसिंहर्षभगतिः श्रीमान्द्विषतस्ते हनिष्यति
sa yuvā vṛṣabhaskandho dīrghabāhurmahābalaḥsiṃharṣabhagatiḥ śrīmāndviṣataste haniṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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