महाभारत 7.6.17
ककुदं सर्वसैन्यानां लक्ष्म सर्वधनुष्मताम्आदित्यपथगः केतुः पार्थस्यामिततेजसः
kakudaṃ sarvasainyānāṃ lakṣma sarvadhanuṣmatāmādityapathagaḥ ketuḥ pārthasyāmitatejasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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