महाभारत 7.6.27
अपतद्दीप्यमाना च सनिर्घाता सकम्पनाउल्का ज्वलन्ती संग्रामे पुच्छेनावृत्य सर्वशः
apataddīpyamānā ca sanirghātā sakampanāulkā jvalantī saṃgrāme pucchenāvṛtya sarvaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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