महाभारत 7.61.9निवेशने सत्यधृतेः सोमदत्तस्य संजयआसीनोऽहं पुरा तात शब्दमश्रौषमुत्तमम्niveśane satyadhṛteḥ somadattasya saṃjayaāsīno'haṃ purā tāta śabdamaśrauṣamuttamamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें