महाभारत 7.62.22
यावत्तु शक्यते कर्तुमनुरक्तैर्जनाधिपैःक्षत्रधर्मरतैः शूरैस्तावत्कुर्वन्ति कौरवाः
yāvattu śakyate kartumanuraktairjanādhipaiḥkṣatradharmarataiḥ śūraistāvatkurvanti kauravāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें