महाभारत 7.63.32
सशैलसागरवनां नानाजनपदाकुलाम्ग्रसेद्व्यूहः क्षितिं सर्वामिति भूतानि मेनिरे
saśailasāgaravanāṃ nānājanapadākulāmgrasedvyūhaḥ kṣitiṃ sarvāmiti bhūtāni menire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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