महाभारत 7.63.4
विकोशान्सुत्सरूनन्ये कृतधारान्समाहितान्पीतानाकाशसंकाशानसीन्केचिच्च चिक्षिपुः
vikośānsutsarūnanye kṛtadhārānsamāhitānpītānākāśasaṃkāśānasīnkecicca cikṣipuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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